5 फ़रवरी 2011

खाकी वर्दीवाले और जनता भगवान भरोसे

अजब देश की एक कथा है। उस देश की जनता गुंडे-बदमाशों से दुखी थी। उन्होंने ईश्वर को पुकारा। ईश्वर प्रकट हुए। पूछा- ''क्या चाहिए भक्तो।' जनता बोली - ''हमें गुंडे-बदमाशों से बचाओ। ये लोग हमें परेशान करते हैं। हमारी बहू-बेटियों को छेड़ते हैं। प्रभो, कुछ उपाय करो कि इन पर अंकुश लग सके।''
प्रभुजी ने 'तथास्तु' कहा और अंतर्धान हो गए। थोड़ी देर बात खाकी वर्दी वाले कुछ लोग अवतरित हुए।
एक ने कहा - ''हे अजब देश के निवासियो, हम लोगों को प्रभुजी ने आपकी सुरक्षा के लिए धरती पर भेजा है। अब आप आराम से रहिए। हम सब कुछ संभाल लेंगे।''
अजब देश के लोग खुश हो गए। भगवान को धन्यवाद दिया। कुछ दिन तक हालात अच्छे रहे, लेकिन धीरे-धीरे दुर्दिन शुरू हो गए। पहले यहाँ की जनता गुंडे-बदमाशों से दुखी रहती थी। अब खाकी वर्दी वालों से दुखी रहने लगी। लोगों से बेवजह मारपीट करना, महिलाओं को छेडऩा, दुकानों से चीजें उठा लेना और पैसे न देना, सड़क चलते लोगों पर जबरन डंडे बरसाना, रात दस-ग्यारह ब जे घर के सामने टहल रहे लोगों को गालियाँ देना, कानून-व्यवस्था के नाम पर सायरन बजाकर और बंदूकों से लैस होकर गाडिय़ों में घूमना, जब-तब लोगों को धमकाते-चमकाते रहना। शरीफों को पीटना और गुंडे-बदमाशों को अभयदान दे देना। ये सबसहकत देख कर जनता रोने लगी। लोगों ने आपस में विचार-विमर्श किया कि ईश्वर ने ये जो खाकी वर्दी वालों को भेजा है, वे तो गुंडे-बदमाशों से खतरनाक निकले। पहले हम गुंडे-बदमाशों से जूझते थे, अब तो इनसे जूझना पड़ रहा है।
एक ने कहा - ''भई, हम तो बुरे फंसे।''
दूसरा -''इससे तो अच्छे गुंडे-बदमाश ही थे।''
तीसरा - ''टेंशन बढ़ता जा रहा है। ईश्वर को बुलाओ, वही कुछ करेगा।''
अजब देश के लोगों ने प्रार्थना की, कृपाला प्रकट भये। बोले - ''भक्तो, अब क्या परेशानी आन पड़ी ?''
एक बोला -''आपने ये जो खाकी वर्दी वाली सेना भेजी है, उसने तो हमारी नाक में दम कर दिया है। ये तो और और ज्यादा अत्याचारी निकले। इन्हें यहाँ से हटाओ वरना हमारे जीवन का सुख-चैन ही नष्टï हो जाएगा।''
प्रभु बोले - ''लेकिन प्रिय भक्तो, हम इतने सारे लोगों को वापस ले जाकर कहाँ 'एडजस्ट' करेंगे ? स्वर्गलोक तो बढ़ती आबादी के कारण वैसे भी 'हाउसफुल' होता जा रहा है।''
एक भक्त बोला - ''लेकिन ये आपके नये सेवक तो नर्क-लोक के लायक हैं। उन्हें वहीं रखिए। इन्होंने धरती के लोगों को काफी दुखी कर दिया है। इनके आचरण देख कर गुंडे-बदमाश तक पानी पानी हो रहे हैं।''
ईश्वर ने आँख मूँद कर कुछ ध्यान किया फिर बोले -''निसंदेह बहुत बड़ी गलती हो गई है मुझसे। ये जो खाकी वर्दी वाले हैं, इनको मैंने देवदूत समझ कर धरती पर भेजा था। लेकिन इनमें से तो अधिकांश राक्षस हैं, राक्षस। इन्होंने देवदूतों को कैद कर लिया है और उसकी जगह खुद धरती पर आ गए। वही तो मैं कहूँ कि खाकी वर्दी वाले जो स्वर्गलोक में राक्षसों के अत्याचार से सबकी सुरक्षा करते थे, धरती पर आकर अत्याचारी कैसे हो गए?''
अजब देश की जनता ने पूछा - ''प्रभो, आप अपनी गलती को जल्द से जल्द सुधार लें वरना हम लोग तो बर्बाद हो जाएंगे। आपके राक्षसों के किस्से हम लोग सुन चुके हैं। इनके आचरण देख कर हम समझ गए थे कि ये लोग देवदूत नहीं हो सकते। ये तो यमदूत हैं, यमदूत। प्रभो, आप खामोश रहेंगे तो हम लोग कहाँ जाएंगे।''
प्रभुजी ने कहा - ''भक्तजनो, आप चिंतित न हों। ये खाकी वर्दी वाले दरअसल भस्मासुर के  वंशज हैं। भस्मासुर को शंकर भघवान ने आशीर्वाद दिया था कि जिस किसी के सिर पर हाथ रखोगे, वह भस्म हो जाएगा। इनको मैं भस्म नहीं कर सकता। लेकिन इनको नर्क लोक भेजने का कुछ न कुछ बंदोबस्त करना ही पड़ेगा। मैं जा रहा हूँ... भगवान शंकर से 'डिस्कशन' करने।''
भक्त चीखे - ''भगवन, आप जल्दी लौटें, वरना हम लोग धरती के दोहरे अत्याचार के कारण खुदक शी करने पर मजबूर हो जाएँगे।'' भगवन बोले - ''तो क्या सारे के सारे खाकी वर्दी वाले अत्याचारी हैं ?''
भक्त बोले - ''ऐसी बात नहीं है प्रभो। खाकी वर्दी वालों में से दो फीसदी अच्छे लोग भी हैं। ये लोग बदमाशों से रक्षा करते हैं शरीफों की। आदमी से आदमी की तरह व्यवहार करते हैं। इन्हें देख कर लगता है, काश, आपके भेजे गए सारे दूत इसी नस्ल के होते।'' प्रभुजी बोले - ''ठीक कहते हो। मुझे लगता है,जब मैं देवदूतों को धरती भेजने का आदेश दे रहा था, तब यमदूतों ने सुन लिया और वेश बदल कर खाकी वर्दीधारियों के बीच जा घुसे। इसीलिए आप लोगों को तकलीफ हो रही है। खैर..! कोई बात नहीं। मैं स्वर्ग लोक जाकर देवताओं से चर्चा करूंगा। और बहुत जल्दी देवदूतों की खेप भेजने की कोशिश करूँ गा।''
इतना बोलकर भगवान चले गए। अजब देश की जनता इंतजार करती रही कि अब आएँगे...भगवान अब आएँगे, देवदूतों को लाएँगे। यमदूतों को अपने साथ लेकर जाएँगे। जनता फिर से सुखी जीवन बिताएगी लेकिन पता नहीं, ऐसा क्या हुआ कि भगवान नहीं आए, तो नहींच्च आए। जनता इन खाकी वर्दीवालों से निपट नहीं सकती थी। केवल भगवान ही कुछ कर सकते थे इनका। लोग भगवान भरोसे बैठे रह गए। भगवान नहीं लौटे।
ये कथा तो अजब देश की है। अपने यहाँ खाकी वर्दी वाले तो बड़े भले हैं शायद।
एम आई रांग?

7 टिप्‍पणियां:

  1. भगवान भी अपनी गलती पर पछता रहे हैं | और त्रुटी के निवारण का रास्ता भी उनको दिखाई नहीं दे रहा है कृपया उन्हें क्षमा करें ...

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  2. वर्ड वेरिफिकेसन हटा , अगर बुरा ना मानें तो

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  3. ये अजब देश कहां है गिरीश जी जरा ? मुझे तो यह कहीं कहीं से अपने देश जैसा लगता है। अच्‍छा व्‍यंग्‍य। पढकर मजा आ गया।

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  4. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
    चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
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  5. अच्‍छा व्‍यंग्‍य। पढकर मजा आ गया।

    आप को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  6. "''भक्तजनो, आप चिंतित न हों। ये खाकी वर्दी वाले दरअसल भस्मासुर के वंशज हैं।" | करारा व्यंग है आपका खाकी वर्दी वालों पर . मेरी बधाई स्वीकारें- अवनीश सिंह चौहान

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