20 अगस्त 2013

गरीबी एक मानसिकता है


अभी-अभी हमें ज्ञात हुआ है कि गरीबी और कुछ नहीं, एक मानसिकता है.
जैसे मन चंगा हो तो कठौती में गंगा उतर आती है, उसी तरह मन अच्छा हो तो गरीबी गरीबी नही, अमीरी लगने लगती है।  आजकल हमारे अनेक  नेता प्रवचन दे कर दिल जीत रहे हैं. इनके भाषण सुन लो, तो लगता है अब स्वर्ग उतरने ही वाला है धरा पर. पिछले दिनों एक युवा नेता ने फरमाया कि देश के लोग अपने आप को गरीब समझना छोड़ दें क्योंकि .ये केवल 'डर्टी मेंटल' स्थिति है. गरीब समझोगे तो लगेगा हम गरीब है, तो समझना ही क्यों? भूख लगे तो यही सोचो कि हमरा पेट लबालब भरा हुआ है. प्यास लगे, तो सोचो कि  हम 'पिए हुए' हैं। तब देखो, जीवन का परम-आनंद।''
नेताजी का 'प्रवचन' सुन कर कुछ  गरीब भूख-प्यास से मुक्त हो कर उनसे मिलने पहुँच गये उनके घर. सुरक्षा कर्मी ने उन्हें रोक दिया,''अरे-अरे, कहाँ घुसे चले आ रहे हो ?''
एक गरीब खुद को बड़ा नेता और महा अमीर समझाने लगा था, वह बोला, ''हम लोग दिखते गरीब हैं  लेकिन अपने आप को करोडपति से कम नहीं समझते। हमारे नेता ने ही यह ज्ञान दिया है. हम उनका आभार ज्ञापन करने आये हैं.''
गरीबों की बात सुन कर नेता के चमचे हँस पड़े.एक बोला, ''हमारे बाबा की बातों को सीरियसली मत लिया करो भाई, हम लोग खुद नहीं लेते. जाओ, बाद में मिलने आना.''
गरीब जिद करने लगे कि हम तो मिल कर ही जायेंगे। शोर सुन कर नेताजी बाहर निकले तो गरीब उनकी और लपके। नेताजी घबराए, अरे ये गरीब यहाँ क्या कर रहे हैं. वे पीछे हटने लगे. एक गरीब बोला, ''आप धन्य है. हम आपको प्रणाम करने आये हैं।  जब से आप ने कहा है कि खुद को गरीब मत समझो, हम लोग बड़े सुखी है. अब न भूख लगती हैं न प्यास। हम गरीब हैं मगर खुद को अरबपति समझने लगे है. ये देखिये अम्बानी जी है. वो टाटा है, उधर जो खडा है वो बिडला है. हम सब अमीर है. आपने जो फंडा दिया है न, उससे हम लोग उत्साहित हो गए हैं. अब हम लोग अपने को गरीब ही नहीं समझते, और मंत्री से भी कम नहीं समझते। उस असरदार आदमी को देखें, कहता है मै प्रधानमंत्री हूँ. और उस भिखारन को देखिये, वो भी खुद को कुछ -न -कुछ बताती रहती हैं. तो, आपका बड़ा अहसान हो गया हम पर. आज लग रहा है कि सचमुच गरीबी एक मानसिक स्थिति है. भूखे रह कर भी हम ऐश कर रहे है. ज़िंदगी के सारे मज़े कैश कर रहे है. जब जैसा मूड होता है, वैसे बन जाते है. मौजा ही मौजा है''
नेताजी जी गदगद। उनकी आँखों से अश्रु बहने लगे. वे बोले, ''अब इस देश से गरीबी हट कर रहेगी। हमारी दादी जी बड़ी चिन्ता करती थी कि गरीबी ह्टे, अब वो हट कर रहेगी। आप लोग मेरी बात को समझ गए मतलब आपकी मानसिक स्थिति अच्छी है. अरे, हम खुद यही सोचते है कि इस देश के राजा हैं और आने वाले कई वर्षो तक यहाँ राज करेंगे। ऊंची सोच रखो. अच्छा,तो हम चलते हैं.''
एक गरीब बोला, ''आपके लिए अभिनंदन पत्र लाये हैं, स्वीकार कीजिये.'' युवा नेता  को अभिनंदन पत्र नज़र नहीं आया तो  एक गरीब बोला, ''आप सोचिये कि आपके हाथ अभिनंदन पत्र है। ''  नेता जी मुस्कराए और आगे बढ़ गये.

2 टिप्‍पणियां:

  1. अहा, मै भी अपने लिये आज से कई करोड़पति मानने लगता हूँ, शानदार व्यंग्य.

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  2. Extremely well written and well presented .. kudos to u

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