4 मार्च 2011

अच्छा आदमी है बेचारा.....

नईदुनिया के २ मार्च के अंक में प्रकाशित व्यंग्य..

3 टिप्‍पणियां:

  1. बेचारा होना ही अच्छा है, सुख तो रहेगा अपने पास, समृद्धि भले न रहे।

    धारदार व्यंग्य है।

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  2. बेचारा=जो चारा न खा सके.
    बहुत ही सटीक चोट करते हैं.
    सलाम.

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